एक अनूठा विवाह समारोह
वे एक शादी में शामिल होने आए थे. वर-वधू को आशीर्वाद देने के बाद बड़े इत्मीनान से कुर्सियों पर जम गए. यहां तक कि पंडाल में लगी खाने की मेज की तरफ देखना भी उन्होंने गवारा नहीं किया. कृषि संकट पर अपने विचार प्रकट कर रहे विद्वजनों की बातों को वे बड़े ध्यान से सुन रहे थे. क्या आप कभी इस तरह की अनोखी शादी में शामिल हुए हैं या फिर इसके बारे में सुना तक है? अगर नहीं तो कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के होसदुर्ग गांव में आपका स्वागत है. निश्चित तौर पर इस गांव ने एक नई मिसाल कायम की है. यह विवाहोत्सव शहरों में होने वाली शादियों में शानो-शौकत का भद्दा प्रदर्शन करने वाले नवधनाढ्य वर्ग को शर्मसार करने वाला है. इस असाधारण शादी में हुए नवीन प्रयोग ने उत्प्रेरक का काम किया. चित्रदुर्ग और पास के अन्य जिलों के हजारों किसान रविशंकर और शकुंतला की शादी में शामिल होने होसदुर्ग गांव पहुंचे. लोगों द्वारा विवाह में धूमधाम न करने का कारण मुंबई हमलों से विषादग्रस्त मन:स्थिति नहीं थी, बल्कि कर्नाटक में भयावह कृषि संकट के कारण उनकी बदहाली ने उन्हें ऐसा करने को मजबूर किया. कंप्युटर से संबंधित पोस्ट के लिए क्लिक करे...